दुर्ग में सीमांकन और रकबा बैठाने के नाम पर बड़ा खेल: RI विजय शर्मा और MIC सदस्य निलेश अग्रवाल पर 25 लाख की रिश्वत और सांठगांठ का आरोप
दुर्ग। दुर्ग जिले में जमीन के सीमांकन और रकबा बैठाने के नाम पर एक बड़े भ्रष्टाचार और सौदेबाजी का खेल सामने आया है। पीड़ित भू-स्वामी रजत सुराना ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए राजस्व विभाग के अधिकारियों और राजनीतिक रसूखदारों के गठजोड़ का सनसनीखेज खुलासा किया है। सुराना ने आरोप लगाया है कि विवादित सीमांकन प्रकरणों को जानबूझकर पेचीदा बनाकर ‘टीम फॉर्मेशन’ (दल गठन) के नाम पर लाखों रुपये की सौदेबाजी की जा रही है और पैसे न देने पर भू-स्वामियों की जमीनों को जबरन दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड राजस्व निरीक्षक (RI) विजय शर्मा को बताते हुए रजत सुराना ने उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
क्या है पूरा मामला?
रजत सुराना ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2005 में पवन अग्रवाल से खसरा नंबर 80/3 की कुल 0.417 हेक्टेयर भूमि खरीदी थी। इसी खसरा नंबर से वर्ष 1994 से 2005 के बीच लगभग 11 अन्य लोगों ने भी जमीनें खरीदीं। इन भूमियों के बीच आवागमन के लिए विक्रेता पवन अग्रवाल द्वारा 30 फीट और 60 फीट चौड़ी सड़क छोड़ी गई थी, जो आज भी मौके पर मौजूद है। आश्चर्यजनक रूप से इस सड़क का रकबा आज भी पवन अग्रवाल के मूल खसरा नंबर 80/3 में ही दर्ज है। स्वयं पवन अग्रवाल ने पूर्व में तहसीलदार के समक्ष आपत्ति दर्ज कराते हुए यह स्वीकार किया था कि 80/3 की बचत जमीन सड़क-रास्ते की है, जिसका उल्लेख तहसीलदार के आदेशों में भी है।
राजनीतिक रसूख और 25 लाख की डिमांड का आरोप
मामले में नया मोड़ तब आया जब पवन अग्रवाल का पुत्र निलेश अग्रवाल पार्षद और नगर निगम में MIC सदस्य बन गया। आरोप है कि निलेश अग्रवाल अपने राजनीतिक प्रभाव और पैसे के दम पर उस सार्वजनिक सड़क-रास्ते की भूमि को रजत सुराना की निजी भूमि (खसरा नंबर 80/352) में जबरन समाहित (एडजस्ट) कराने का प्रयास कर रहा है।
रजत सुराना का आरोप है कि:
”RI विजय शर्मा द्वारा इस काम को निपटाने के एवज में मुझसे 25 लाख रुपये की मांग की गई थी। जब मैंने तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई की बात कही, तो RI ने साफ लफ्जों में कहा कि ‘काम उसी के फेवर में होगा जो पैसे देगा।'”
सुराना ने यह भी बताया कि उनकी लिखित आपत्ति को अधिकारियों द्वारा जानबूझकर रिसीव नहीं किया गया, यहाँ तक कि व्हाट्सएप पर भेजी गई आपत्ति को भी नजरअंदाज कर दिया गया।
सीमांकन की पूर्व संध्या पर आधी रात को ‘गुप्त मुलाकात’
शिकायतकर्ता ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि सीमांकन की तय तारीख (15.05.2026) से ठीक एक रात पहले, यानी 14.05.2026 की रात लगभग 11 बजे पटेल चौक (पोस्ट ऑफिस के पास), RI विजय शर्मा और पुलगांव पटवारी को MIC सदस्य निलेश अग्रवाल के साथ गुप्त बैठक करते देखा गया। प्रत्यक्षदर्शी गणेश तिवारी ने उन्हें हाथ मिलाते और चर्चा करते देखा, लेकिन जैसे ही RI की नजर तिवारी पर पड़ी, वे तुरंत वहां से खिसक गए। सुराना का कहना है कि सीमांकन से ऐन पहले रात के अंधेरे में हुई यह मुलाकात पूरी मिलीभगत और पक्षपात की कहानी को साफ बयां करती है।
पीड़ित ने प्रशासन से की ये 5 बड़ी मांगें:
रजत सुराना ने इस मामले को केवल अपने तक सीमित न बताते हुए इसे दुर्ग जिले की पूरी राजस्व व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह कहा है। उन्होंने शासन-प्रशासन से निम्नलिखित मांगें की हैं:
निष्पक्ष जांच: दुर्ग जिले में पिछले कुछ वर्षों में हुए सभी विवादित सीमांकन और रकबा बैठाने के मामलों की पुनरीक्षण जांच हो।
RI को हटाने की मांग: आरोपी RI विजय शर्मा की भूमिका की जांच कर उन्हें तत्काल इस प्रकरण से अलग किया जाए।
सीमांकन पर रोक: वर्तमान पक्षपातपूर्ण सीमांकन प्रक्रिया को तुरंत रोककर पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच हो।
कॉल रिकॉर्ड खंगालने की मांग: RI विजय शर्मा के कॉल डिटेल (CDR) और कॉल रिकॉर्डिंग की जांच की जाए ताकि कथित मिलीभगत और दबाव का पर्दाफाश हो सके।
सड़क को सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करना: खसरा नंबर 80/3 की बचत भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में पृथक रूप से ‘सड़क-रास्ता’ घोषित किया जाए।
अन्य पीड़ितों से एकजुट होने की अपील
रजत सुराना ने दावा किया है कि उनके पास दुर्ग जिले के ऐसे कई अन्य सीमांकन घोटाले के पुख्ता दस्तावेज मौजूद हैं, जिनका वे आने वाले समय में सिलसिलेवार खुलासा करेंगे। उन्होंने दुर्ग के अन्य पीड़ित भू-स्वामियों से भी अपील की है कि वे अपने दस्तावेजों के साथ उनसे संपर्क करें, ताकि इस भ्रष्ट तंत्र के खिलाफ मिलकर लड़ाई लड़ी जा सके।








