दुर्ग/पाटन: पाटन से दुर्ग को जोड़ने वाली मुख्य फोरलेन सड़क इन दिनों अपनी बदहाली और प्रशासनिक अनदेखी के कारण चर्चा में है। वीआईपी रूट कहे जाने वाले इस मार्ग के बीचों-बीच बने डिवाइडर पर लगी लोहे की जालियां लगातार चोरी हो रही हैं। हैरानी की बात यह है कि मुख्य मार्ग होने के बावजूद चोर बेखौफ होकर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जबकि जिम्मेदार विभाग चैन की नींद सो रहा है।
सड़क सुरक्षा और मवेशियों को रोकने के उद्देश्य से शासन ने डिवाइडर के बीच में लोहे की ऊँची जालियां (ग्रील) लगवाई थीं। लेकिन पिछले कुछ समय से पाटन से फूंडा तक के बिच इन जालियों को काटकर गायब किया जा रहा है। सड़क के कई किलोमीटर के हिस्से में जालियां नदारद हैं।
बढ़ रहा है हादसों का खतरा
डिवाइडर से जालियां गायब होने के कारण अब आवारा मवेशी आसानी से सड़क के एक ओर से दूसरी ओर कूद रहे हैं। इससे तेज रफ्तार वाहनों के टकराने और बड़ी दुर्घटनाएं होने का अंदेशा बढ़ गया है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि रात के अंधेरे में संगठित गिरोह इन जालियों को काटकर ले जा रहे हैं, जिसकी जानकारी विभाग को होने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही।
विभागीय चुप्पी पर खड़े हो रहे सवाल
क्षेत्रीय जनता में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि लोक निर्माण विभाग (PWD) या संबंधित निर्माण एजेंसी इस मामले में ‘मौन’ क्यों है?
फिलहाल स्थिति जस की तस बनी हुई है।
”यह सड़क क्षेत्र की लाइफलाइन है। लाखों की सरकारी संपत्ति चोरी हो रही है और अधिकारी ऑफिसों में बैठे हैं। अगर जल्द ही इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो पूरी सड़क से लोहे के स्ट्रक्चर गायब हो जाएंगे।”
शासन की संपत्ति की सुरक्षा करना संबंधित विभाग की प्राथमिकता होनी चाहिए। पाटन-दुर्ग मार्ग पर हो रही यह चोरी न केवल आर्थिक नुकसान है, बल्कि आम जनता की जान से खिलवाड़ भी है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस ‘कुंभकरणीय नींद’ से कब जागता है।







