बस्तर में ‘अघोषित टैक्स’ – सरकारी शराब दुकानों में खुलेआम ओवररेट वसूली, जिम्मेदार मौन

[adsforwp id="60"]
xr:d:DAFZa2lduN0:4026,j:1537268935971422715,t:24011511

​जगदलपुर/ छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से इन दिनों आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। संभाग मुख्यालय जगदलपुर सहित विभिन्न क्षेत्रों में संचालित सरकारी शराब दुकानों में निर्धारित मूल्य (MRP) से अधिक दाम पर शराब बेचे जाने की शिकायतें अब आम हो चली हैं। आलम यह है कि सेल्समैन और सुपरवाइजर बिना किसी खौफ के ग्राहकों से 10 से 50 रुपये तक की अतिरिक्त वसूली कर रहे हैं।

​क्षेत्र में विधायक, सांसद और प्रदेश स्तर के कई कद्दावर नेता मौजूद हैं, बावजूद इसके जमीनी हकीकत बदलने का नाम नहीं ले रही है। आम उपभोक्ताओं का कहना है कि न तो विभागीय अधिकारियों का इन कर्मचारियों पर कोई नियंत्रण है और न ही जनप्रतिनिधियों की कोई धमक दिखाई दे रही है। विपक्ष की चुप्पी ने भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जनता के मन में अब यह सवाल घर कर गया है कि आखिर इन छोटे कर्मचारियों को किसका संरक्षण प्राप्त है, जो वे नियम-कानून को ताक पर रखकर वसूली कर रहे हैं?

​नियमानुसार हर खरीद पर उपभोक्ता को बिल दिया जाना अनिवार्य है, लेकिन बस्तर की अधिकांश दुकानों में बिल देने की परंपरा लगभग खत्म हो चुकी है। जब कोई जागरूक ग्राहक बिल की मांग करता है या ओवररेट का विरोध करता है, तो उसके साथ अभद्रता की जाती है।
​बस्तर के एक जागरूक नागरिक का कहना है की “हम बार-बार शिकायत करते हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती। ऐसा लगता है जैसे ऊपर से नीचे तक सब मिलाजुला खेल है। यदि सरकारी दुकानों में ही लूट मचेगी, तो आम आदमी न्याय की उम्मीद किससे करे?”

​इस अव्यवस्था के खिलाफ क्षेत्र के जागरूक नागरिकों ने शासन-प्रशासन से निम्नलिखित मांगों पर तत्काल अमल करने की अपील की है!
​सघन जांच- संभाग की सभी शराब दुकानों में औचक निरीक्षण और स्टॉक की जांच की जाए।
​कड़ी कार्रवाई- ओवररेट वसूली में संलिप्त सुपरवाइजर्स और सेल्समैन को तत्काल बर्खास्त किया जाए।
​अनिवार्य बिलिंग- दुकानों पर ‘नो बिल, नो पेमेंट’ का बोर्ड लगाया जाए और डिजिटल बिलिंग सुनिश्चित हो।
​पारदर्शी शिकायत प्रणाली- शिकायतों के लिए एक प्रभावी हेल्पलाइन नंबर जारी किया जाए, जिस पर हुई कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक हो।
​अब देखना यह होगा कि विभागीय चेयरमैन और उच्चाधिकारी इस ‘खुली लूट’ पर कब लगाम कसते हैं, या फिर बस्तर की जनता इसी तरह व्यवस्था के आगे बेबस बनी रहेगी।

Leave a Comment