कुम्हारी गैस सिलेंडर ब्लास्ट , एक बंद कमरे में राख हुए चार जीवन और अधूरे सवाल

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​दुर्ग। कुम्हारी के वार्ड क्रमांक 04, खपरी रोड के लिए खुशियों वाली नहीं, बल्कि मातम की चीखें लेकर आई। एक साधारण सा घर, जो सोमवार की रात तक सपनों से भरा था, मंगलवार की सुबह तक काल की राख में तब्दील हो चुका था। होमदास वैष्णव (40) के साथ उनकी दो बेटियां—लक्ष्मी (18) और चांदनी (17)—और महज दो साल की मासूम गोपिका अब इस दुनिया में नहीं हैं।

​जैसे ही घर की खिड़कियों से धुएं का गुबार उठा, स्थानीय निवासियों में अफरा-तफरी मच गई। पुलिस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां सायरन बजाते हुए खपरी रोड की ओर दौड़ीं, लेकिन तब तक आग ने उस छोटे से परिवार को अपनी आगोश में ले लिया था। आग पर काबू तो पा लिया गया, पर उन चार जिंदगियों को नहीं बचाया जा सका जो भीतर फंसे रह गए थे।

​यह आग महज एक दुर्घटना है या इसके पीछे कोई और कारण छिपा है? इस गुत्थी को सुलझाने के लिए प्रशासन ने फॉरेंसिक विशेषज्ञों का सहारा लिया है।
​ घटनास्थल से नमूने एकत्र किए गए हैं ताकि आग लगने के शुरुआती स्रोत (शॉर्ट सर्किट, गैस रिसाव या अन्य) का पता लगाया जा सके।
​ पुलिस अब शवों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, जिससे मौत के सटीक समय और कारणों की पुष्टि हो सके।

​कुम्हारी की इस घटना ने रिहायशी इलाकों में फायर सेफ्टी और आपातकालीन निकास को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

​पुलिस ने फिलहाल मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। पूरा वार्ड इस वक्त स्तब्ध है, और हर आंख में केवल एक ही सवाल है—क्या इस त्रासदी को टाला जा सकता था?
​वैधानिक कार्रवाई: दुर्ग पुलिस द्वारा मामले की सूक्ष्मता से जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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