दुर्ग/पाटन
कहते हैं कि नेताओं के वादे और चुनावी घोषणाएं अक्सर समय के साथ धुंधली पड़ जाती हैं, लेकिन जब वादा किसी की अंतिम विदाई और राजकीय सम्मान के बीच किया गया हो, तो उसकी अहमियत बढ़ जाती है। कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है जहाँ राजकीय सम्मान के साथ विदा हुए स्व. गोवर्धन जायसवाल के अंतिम संस्कार के दौरान किए गए वादे अब तक अधूरे हैं।
क्या था पूरा मामला?
ग्राम तरीघाट के पूर्व सरपंच अशोक साहू ने बताया की एक वर्ष पूर्व, क्षेत्र के सम्मानित नागरिक श्री गोवर्धन जायसवाल का निधन हुआ था। उनके अंतिम संस्कार में शासन-प्रशासन के आला अधिकारियों के साथ-साथ क्षेत्रीय सांसद विजय बघेल और विधायक ललित चंद्राकर भी शामिल हुए थे। राजकीय सम्मान के बीच जब अंतिम विदाई की प्रक्रिया चल रही थी, तब सांसद महोदय को ग्रामवासियों ने श्मशान घाट में शेड (टीन शेड) न होने की समस्या से अवगत कराया था।
सांसद ने सरपंच को किया था आश्वस्त
मौके की गंभीरता और ग्रामीणों की तकलीफ को देखते हुए, सांसद विजय बघेल ने मंच और भीड़ के सामने वर्तमान सरपंच को तत्काल हामी भरी थी। उन्होंने सार्वजनिक रूप से आश्वासन दिया था कि श्मशान घाट में शेड का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द कराया जाएगा।
एक साल बीता, सवाल अब भी बरकरार है.
आज इस घटना को पूरा एक वर्ष बीत चुका है, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। ग्रामीण आज भी खुले आसमान के नीचे अंतिम संस्कार करने को मजबूर हैं। अब गांव के लोग और परिजन सांसद महोदय से कुछ सवाल पूछ रहे हैं:
सांसद जी, आपकी वह घोषणा कहाँ गई?
क्या श्मशान शेड की फाइल अभी भी सरकारी दफ्तरों की धूल फांक रही है?
एक साल बीत जाने के बाद भी आखिर स्वीकृति कहाँ अटकी है?
पूर्व सरपंच सहित ग्रामीणों का कहना है की “राजकीय सम्मान के समय बड़े-बड़े नेताओं का आना हमारे लिए गर्व की बात थी, लेकिन उस समय किया गया वादा सिर्फ एक दिलासा बनकर रह गया। बारिश और धूप में शवदाह के समय होने वाली तकलीफें आज भी वैसी ही हैं।”
इस मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। देखना यह होगा कि क्या सांसद महोदय अपनी घोषणा पर अमल होता है हैं या यह मुद्दा केवल फाइलों तक ही सीमित रहेगा।
वर्तमान सरपंच चंद्रिका साहू ने बताया की श्मशान घाट मे शेड निर्माण कराने के इस विषय पर अभी हाल मे सांसद जी से बात हुई है.






