अंचल में खरीफ धान फसल की कटाई-मिंजाई जोरो पर है। अर्ली व लेट वेरायटी की फसल एक साथ कटाई-मिंजाई हो रही है। इनमें ज्यादातर किसान बादल वाले मौसम को देखते हुए हार्वेस्टर से कटाई-मिंजाई करा रहे हैं, इससे धान में ज्यादा नमी बना रहता है। अधिक नमी के चलते किसान सीधे धान को बेचने समर्थन मूल्य पर नहीं ले पा रहे हैं, क्योंकि 17 प्रतिशत से अधिक नमी मिलने पर धान की खरीदी केन्द्रों में नहीं की जाती। किसानों को वापस घर लाकर सूखाना पड़ता है। खरीदी केन्द्र झुरानदी में आए किसान 18, 19 व 20 प्रतिशत नमी आने के कारण धान को बिना बेचे वापस घर ला रहे हैं, इससे उन्हें परिवहन खर्च दोबारा उठाना पड़ रहा है। यही वजह है कि अधिकांश किसान हार्वेस्टर से कटाई-मिंजाई के बाद धान फसल को तीन से चार दिनों तक सूखाकर बेचने के लिए जा रहे हैं।एक साथ बड़ी संख्या में किसान फसल की कटाई-मिंजाई करा रहे हैं, ऐसे में उत्पादित धान को सूखाना अब गांवों में जगह कम पड़ने लगा है। मौसम खराबी पानी गिरने से किसन हताहत है ,


