अवैध निर्माण पर चली जेसीबी, अहिवारा नगर पालिका की सख्ती, क्षेत्र में मचा हड़कंप

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राकेश जसपाल की रिपोर्ट —–

जेके लक्ष्मी सीमेंट से जुड़ी एजेंसी पर पालिका की कार्रवाई, विद्युत सामग्री जब्त
बीएसपी की नदिनी खदान से भिलाई-3 तक प्रस्तावित रेलवे लाइन के विद्युतीकरण कार्य पर कार्रवाई

नंदिनी अहिवारा:-

अहिवारा नगर पालिका ने भिलाई इस्पात संयंत्र की नंदिनी खदान से भिलाई-3 तक प्रस्तावित रेलवे लाइन के विद्युतीकरण कार्य पर कड़ी कार्रवाई की है।

नगर पालिका की टीम ने मौके पर पहुंचकर जेके लक्ष्मी सीमेंट से जुड़ी एजेंसी द्वारा किए जा रहे कथित अवैध निर्माण को बुलडोजर से हटाया और विद्युत सामग्री जब्त कर ली। पालिका अधिकारियों के अनुसार, रेलवे लाइन के किनारे विद्युत पोल गाड़ने, वायर बिछाने और अन्य संरचनात्मक कार्य बिना आवश्यक अनुमति के किए जा

रहे थे। शहरी सीमा क्षेत्र में इस तरह के किसी भी निर्माण या विद्युत कार्य के लिए स्थानीय निकाय से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है। निरीक्षण के दौरान एजेंसी द्वारा कोई वैध अनुमति दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया, जिसके बाद तत्काल कार्रवाई की गई। सी एम ओ पालिका अधिकारी श्री अंकुर पांडे द्वारा नगर पालिका में जनहित का कार्य कर रहे हैं वह अभी तक किसी भी सीएमओ ने नहीं किया नगर पालिका अहिवारा में राजस्व की बढ़ोतरी करना सीएमओ अंकुर पांडे का महत्वपूर्ण योगदान है, सीएमओ अंकुर पांडे

ने बताया नगर सीमा के भीतर कोई भी संस्था या कंपनी निर्माण या विद्युत कार्य तभी कर सकती है, जब नियमों के अनुसार अनुमति ली जाए। उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई तय है। कार्रवाई की सूचना फैलते ही पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। स्थानीय निवासियों ने इसे प्रशासन की

जुर्माना लगाने के साथ अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है

सख्ती और नियमों के पालन का सकारात्मक कदम बताया, जबकि कुछ लोगों का मानना है कि बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स में समन्वय की कमी से ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई। जेके लक्ष्मी सीमेंट या संबंधित ठेकेदार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है।

कंपनी के पक्ष से बताया जा रहा है कि अधिकारी इस मामले को समझ नहीं पा रहे हैं और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने की संभावना है। नगर पालिका ने स्पष्ट किया है कि जांच जारी है। यदि निर्माण नियमों के विरुद्ध पाया गया तो जुर्माना लगाने के साथ अन्य कानूनी कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। बीएसपी नंदिनी खदान अधिकारियों से संपर्क करने पर उन्होंने फोन नहीं उठाया। अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच के निष्कर्ष और कंपनी के आधिकारिक पक्ष पर टिकी है। यह घटना औद्योगिक परियोजनाओं में स्थानीय निकाय की भूमिका, अनुमति प्रक्रिया और समन्वय की कमी को लेकर नई बहस छेड़ रही है।

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