रायपुर, छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन ने राज्य सरकार से शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष करने की पुरजोर मांग की है। इस संबंध में फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष राजेश चटर्जी के नेतृत्व में मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री को ज्ञापन सौंपकर अनुभवी शिक्षकों की सेवाओं का लाभ प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को दिलाने का आग्रह किया गया है।
फेडरेशन के पदाधिकारियों—विकासखंड अध्यक्ष प्रदीप कुमार वर्मा, उपाध्यक्ष हरिशंकर देवांगन व खिलेन्द्र साहू, सलाहकार लक्ष्मीकांत तिवारी सहित अन्य सदस्यों—ने तर्क दिया है कि सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने से:
अनुभवी शिक्षकों की कमी होगी दूर: राज्य के स्कूलों में रिक्त पदों की समस्या को अनुभवी शिक्षकों के सेवा विस्तार से काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
बुनियादी शिक्षा होगी मजबूत: अनुभवी शिक्षकों के मार्गदर्शन का लाभ एलिमेंटरी से लेकर हायर सेकंडरी तक के विद्यार्थियों को मिलेगा।
UGC नियमों के अनुरूप समानता: केंद्र सरकार और यूजीसी (UGC) ने उच्च शिक्षा में पहले ही 65 वर्ष की आयु निर्धारित की है, जिसे स्कूल शिक्षा विभाग में भी लागू करने की आवश्यकता है।
फेडरेशन ने शिक्षकों की एक बड़ी व्यावहारिक समस्या की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है। पदाधिकारियों के अनुसार:
न्यूनतम पेंशन की पात्रता: 1 जुलाई 2018 से संविलियन की गणना होने के कारण कई शिक्षकों का सेवाकाल 33 वर्ष पूर्ण नहीं हो पा रहा है। ऐसे में वे न्यूनतम पेंशन के लाभ से वंचित हो रहे हैं। सेवानिवृत्ति आयु बढ़ने से उन्हें यह पात्रता मिल सकेगी।
NPS और OPS का द्वंद्व: वर्तमान में शिक्षक एनपीएस (NPS) और ओपीएस (OPS) की जटिलताओं के बीच फंसे हुए हैं। सेवा विस्तार से उन्हें आर्थिक सुरक्षा और बेहतर भविष्य की योजना बनाने का अवसर मिलेगा।
इस मांग का समर्थन करने वालों में तोरण साहू, मनोज साहू, शेषनारायण साहू, सुशील साहू, दरबार साहू और गौतम साहू सहित फेडरेशन के अन्य सदस्य प्रमुख रूप से शामिल हैं।






