सफलता की कहानी, मनरेगा ग्रामीण परिवारों को रोजगार के साथ-साथ आत्मनिर्भर बनने का अवसर दे रही है

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दुर्ग 12 नवम्बर 2025/ ग्राम पंचायत रौंदा, जनपद पंचायत धमधा के निवासी श्री हिरेंद्र वर्मा पहले अपने मवेशियों को एक अस्थायी छप्पर में रखते थे। बरसात और गर्मी में पशुओं की देखभाल में काफी कठिनाइयाँ आती थीं, जिससे दुग्ध उत्पादन भी सीमित रह जाता था। लेकिन जब उन्होंने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत पक्का पशु शेड निर्माण हेतु आवेदन किया, तो यह उनके जीवन का नया अध्याय साबित हुआ। ग्राम सभा की अनुशंसा पर 95 हजार रूपए की राशि स्वीकृत की गई और ग्राम पंचायत रौंदा के माध्यम से यह निर्माण कार्य पूर्ण किया गया।
इस कार्य में श्री वर्मा ने स्वयं श्रमिक के रूप में काम किया और 11 हजार रूपए का पारिश्रमिक अर्जित किया। निर्माण कार्य की देखरेख श्री हिरेंद्र साहू द्वारा की गई। पशु शेड बनने के बाद आज श्री वर्मा के पास तीन दुग्धारू भैंस, गायें हैं, जिनसे प्रतिदिन 5 लीटर से अधिक दूध का उत्पादन होता है। दूध बेचकर वे हर महीने 5 से 6 हजार रूपए तक की अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं।
श्री हिरेंद्र वर्मा बताते हैं कि पहले रोजगार की चिंता रहती थी, पर अब दूध बेचकर हर महीने अच्छी आमदनी हो जाती है। पशु शेड बनने से मवेशियों की देखभाल भी सुगम हो गई है। मनरेगा योजना के अंतर्गत बना यह पक्का पशु शेड न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिरता का आधार बना है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भरता और सम्मानपूर्ण जीवन की ओर अग्रसर कर रहा है। आज श्री हिरेंद्र वर्मा का परिवार अपने परिश्रम और मनरेगा योजना के सहयोग से एक प्रेरणास्रोत बन चुका है।

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