अंडा सहित पूरे अंचल में कमरछठ ,हलषष्ठी त्यौहार बहुत ही हर्षोल्लास और आस्था के साथ मनाया

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अंडा // गौरव ग्राम अंडा सहित पूरे ग्रामीण अंचल में हलषष्ठी (कमरछठ) का पर्व पूरे आस्था और उमंग के साथ मनाया गया। माताएं उपवास रहकर अपने संतान की दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना करती नजर आई।


शाम के समय बेटे के पीठ पर ममता की थाप मारकर आशीर्वाद देती दिखी। दिन भर निर्जला उपवास रहकर शाम को पूजा-अर्चना कर व्रत तोडी। गौरतलब है कि, हलषष्ठी का व्रत भादो महीना के कृष्ण पक्ष के षष्ठी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलरामजी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन पूजा में चना, जौ, गेहूं, मक्का, अरहर, तिंवरा, राहेर, लाई, महुआ, आदि चढ़ाया जाता है। हलषष्ठी पर बिना हल लगे अन्न और भैंस के दूध, दही का उपयोग किया जाता है। इस दिन महुआ का दातुन कर पलाश के पत्तल में पसहर चांवल का भोजन करने की परंपरा है।
इस अवसर पर महिलाएं पूजा के लिए बनाए सगरी कुंड के परिक्रमा लगाकर सामूहिक रूप से गीत भी गाते हैं। उपवास रहने वाली महिलाएं 6 प्रकार के भोग चढ़ा के 6 प्रकार के खिलौना अर्पित करते हैं। 6 प्रकार की कथा कही जाती है। जिसे सुनकर सगरी में 6 बार पानी डाला जाता है। पुत्र के कमर पर 6 बार कपड़ें से पोता मार के 6 प्रकार के भाजी खाकर व्रत तोड़ा जाता है।

शगरी खोद कर करते हैं पूजा पाठ

माताएं दोपहर के समय तालाब नुमा गड्ढा सगरी खोद कर उसमें पानी भरते हैं। सगरी के पार को कांस के मंडप, कलश, बेर, कांशी के फूल, पलाश, गूलर आदि पेड़ के टहनियों से आकर्षक सजाते हैं। महिलाएं भगवान शिव, गौरी, गणेश, कार्तिकेय, नंदी के मूर्ति बनाकर शगरी के चारों तरफ खड़े होकर पूजा पाठ करते हैं।

एम डी युसूफ खान वरिष्ठ पत्रकार
Ⓜ️ 9179799491

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