पाटन क्षेत्र मे लकड़ी कोचिया हुए फिर सक्रिय , बिंदास होकर वनविभाग कार्यालय व थाने के सामने से ले जाते हैँ ट्रेक्टर से प्रतिबंध कौहा, धर पकड़ के नाम पर कार्यवाही शून्य , सेटिंग या राजनीतिक साठगांठ, आखिर किनके सह पर हो रहा अवैध कटाई

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पाटन क्षेत्र में लकड़ी कोचिया सक्रिय , ग्रमीणअंतर्गत अंदरूनी इलाको खोरपा, खम्हरिया, डंगनिया, मटिया, के अंदरूनी क्षेत्रों में प्रतिबंधित कौहा लकड़ी की कटाई जोरों पर है आपको बता दें कि यह कौहा लकड़ी शासन द्वारा प्रतिबंधित है ज्ञात हो की जैसे ही किसानों के द्वारा फसल कटाई का कार्य संपन्न होता है तत्पश्चात लकड़ी कोचिया इस क्षेत्र में सक्रिय हो जाते है व किसानों से संपर्क साधकर हरे-भरे कौहा लकडीयों को भेर सवेरे मशीन के द्वारा आनन फानन में अत्याधुनिक मशीन से काटकर तत्काल लोड कर सुबह 10:00 बजे के अंदर अंदर ले जाया जाता है जिससे आने जाने वाले लोगों को भनक न लगे पाटन से सेलूद ,गाडाडीह, रानितराई, सोनपुर सिपकोणा, सिकोला, खुड़मुडी ,चीचा संतरा, जैसे ग्रामीण क्षेत्र में बहुतायत पेड़ काटे गए है व अभी भी
लकड़ी कोचिया के द्वारा बेझिझक बिना किसी डर के पेट्रोल से चलने वाली सुविधाजनक मशीन से काटवाया जाता है जिससे जिससे कुछ ही देर में बड़े से बड़े पेड़ धराशाई होकर कट जाता है और उन्हें हाइड्रा के द्वारा ट्रैक्टर या माजदा या अन्य गाड़ियों के द्वारा भरकर अपने गंतव्य या मिल गोदाम पर ले जाया जाता है यह सब कटाई की जानकारी वन विभाग के आलाधिकारियों की गश्त उपरांत भी कोचिया के द्वारा दिनदहाड़े लकड़ी काटकर ले जाना अधिकारी के जवाबदेही को शंशय करता है , लोगो की माने तो इस क्षेत्र के अधिकारियों को सब जानकारी रहती है बावजूद कार्यवाही शून्य है ,क्या कोचिया लोगो से साठगांठ है कोई राजनीतिक दबाव आखिर क्यों नही हो रही कार्यवाही ,क्षेत्र में आरमिलो में कौहा लकड़ी भरे पड़े है अगर कौहा की कटाई नही हो रही तो कंहा से आते है मिलो में ये लकड़ी ,सबसे ज्यादा अवैध कटाई का मामला पाटन विधानसभा क्षेत्रान्तर्गत है ,जंहा धड़ल्ले से कटाई हो रही है।

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