दुर्ग / भारत सरकार द्वारा हर गरीब व आवासहीन व्यक्तियों को पक्का मकान देने की नीयत से प्रधानमंत्री आवास योजना लागू किया गया है। इस योजना में 60% केंद्र सरकार द्वारा व 40 % राज्य सरकार द्वारा अनुदान राशि लाभार्थी को दिया जाता है, पर राज्य सरकार द्वारा इस योजना को गंभीरतापूर्वक नही लिये जाने के कारण से छत्तीसगढ़ में आवास योजना से मकान बनना बंद हो गया ।और नए पात्र हितग्राहियों ने आवास योजना के तहत मकान बनाने की मांग भी उठाई, और आंदोलन भी हुआ,
जिससे राज्य सरकार द्वारा सर्वे सूची 2011 में नाम नहीं होने की बाध्यता बताते हुए वर्तमान सरकार ने स्वयं सामाजिक आर्थिक सर्वे पूरे छत्तीसगढ़ में कार्रवाई , इसके बाद बाकायदा घर-घर जाकर सर्वे टीम ने लोगों की विभिन्न जानकारियां पोर्टल व हॉट कॉफी के माध्यम से दर्ज की गई। लोगों को लगने लगा इस बार हमारे साथ न्याय होगा ।
आज इसी सर्वे सूची को मान्यता देते हुए, ग्रामीण आवास न्याय योजना नाम से राज्य सरकार द्वारा विशेष सूची जारी की गई, और इस सूची में उस व्यक्ति या परिवार का नाम नहीं है जिसे आवास की सबसे अधिक आवश्यकता है।
और इस समस्या से निजात पाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़े रहे आज छत्तीसगढ़ के भोले भाले गरीब जनता को कहीं न कहीं सरकार की गलत नीतियों के कारण फिर से आवास योजना से वंछित होना पड़ा ।
इसे साहूजी ने सरकार की नाकामी बताया है।
ढालेश साहू ( यु.प्र.अ. भाकियू व दुर्ग ग्रामीण विधानसभा)






