दुर्ग, 06 अप्रैल 2026/ जिले में प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) योजना के अंतर्गत समर्थन मूल्य पर दलहन और तिलहन की खरीदी शुरू कर दी गई है। विपणन वर्ष 2026-27 के लिए प्राइस सपोर्ट स्कीम के तहत चना, सरसों एवं अरहर की खरीदी का शुभारंभ आज विकासखंड धमधा के सेवा सहकारी समिति घोंटा में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह एवं तेलघानी बोर्ड अध्यक्ष श्री जितेन्द्र साहू ने भगवान बलराम के तैलचित्र पर माल्यार्पण कर किया। शुभारंभ के दौरान किसानों द्वारा लाए गए चना की तौल मशीन में तौल कर खरीदी प्रक्रिया की विधिवत शुरुआत की गई। शुभारंभ अवसर पर 12 किसानों से 336 क्विंटल चना और एक किसान से 10 क्विंटल अरहर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी की गई। 
कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह ने प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण (पीएम-आशा) योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर देते हुए कहा कि किसानों को इसका पूरा लाभ सही तरीके से मिलना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में धान खरीदी एक बड़े अभियान के रूप में सफलतापूर्वक संचालित की गई है और अब अन्य फसलों को भी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर शामिल करने की मंशा भारत सरकार की है। इसी उद्देश्य के तहत पीएम-आशा योजना की शुरुआत की गई है। कलेक्टर श्री सिंह ने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार की मंशा है कि धान के अलावा अन्य फसलों को भी बढ़ावा दिया जाए। लगातार एक ही फसल उगाने से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है और पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। फसल चक्र अपनाने से मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहती है और बीमारियों का खतरा भी कम होता है। धान की खेती में पानी की खपत अधिक होती है। उन्होंने किसानों से चना, दलहन जैसी कम पानी वाली फसलों की खेती करने की सलाह दी। उन्होंने कहा “जल है तो कल है” यदि अभी पानी बचाएंगे तो हमारे आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रहेगा।
तेलघानी बोर्ड के अध्यक्ष श्री जितेन्द्र साहू ने कहा कि धान खरीदी छत्तीसगढ़ सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना रही है, जिसे सरकार ने अपने वादे के अनुरूप सफलतापूर्वक पूरा किया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। किसानों की आमदनी में और वृद्धि हो, इसी उद्देश्य से प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण (पीएम-आशा) योजना लागू की गई है। यह योजना किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने में सहायक होगी। किसानों को डीबीटी के माध्यम से भुगतान भी शीघ्र किया जाएगा। अध्यक्ष श्री साहू ने किसानों से आह्वान किया कि वे पारंपरिक धान की खेती के साथ-साथ अन्य फसलों की ओर भी ध्यान दें। उन्होंने फसल चक्र अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि इससे न केवल मिट्टी की उर्वरता बनी रहेगी और किसानों की आय में भी बढ़ोतरी होगी।
कृषि विभाग के उपसंचालक श्री संदीप भोई ने बताया कि योजनान्तर्गत जिले के 07 समितियों धमधा, घोटा, लिटिया, कन्हारपुरी, चंदखुरी और पाटन को उपार्जन केंद्र के रूप मे अधिसूचित किया गया है। इस योजनान्तर्गत भारत सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य खरीफ फसल अरहर 8000 एवं रबी फसल चना 5875 रूपए, मसूर 7000 रूपए, एवं सरसों 6200 रूपए प्रति क्वि. की दर से पंजीकृत किसानों से उपार्जन किया जाएगा। योजनान्तर्गत शासन द्वारा पंजीकृत कृषकों से खरीफ फसल अरहर 3 क्विंटल एवं रबी फसल चना 6 क्विंटल, मसूर 2 क्विंटल, सरसों 5 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से कृषकों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी की जाएगी। इस अवसर पर जिला सहकारी बैंक सीईओ श्री सुनील वर्मा, श्री मनोज वर्मा, श्री राहुल चंद्राकर डीएमओ, एनसीसीएफ श्री संतोष सिंह सहित बड़ी संख्या में कृषक उपस्थित थे।








