मनरेगा के तहत श्रीमती अनारकली को मिला पक्का पशु शेड, दूध व्यवसाय से हो रही अच्छी आमदनी

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दुर्ग, ग्राम पंचायत महमरा की रहने वाली श्रीमती अनारकली यादव एक साधारण ग्रामीण महिला हैं, पति श्री रामेश्वर यादव के साथ वे वर्षों से पशुपालन और कृषि कार्य के जरिए अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही थीं। श्रीमती अनारकली के पास पहले से कुछ गौधन था, जो उनके जीवनयापन का मुख्य आधार था। लेकिन पशुओं के लिए उचित व्यवस्था न होने के कारण उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। पशुओं को कच्चे शेड में रखा जाता था, जहां न तो साफ-सफाई संभव थी और न ही मौसम से सुरक्षा। बारिश के दिनों में स्थिति और भी खराब हो जाती थी। पशुओं को कभी खुले में रखना पड़ता, तो कभी कीचड़ और गंदगी में। इससे पशुओं का स्वास्थ्य बिगड़ता और दूध उत्पादन भी प्रभावित होता था।
अनारकली लंबे समय से एक पक्के पशु शेड का सपना देख रही थीं, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा था। आखिरकार उन्होंने हिम्मत जुटाई और अपनी समस्या ग्राम सभा में रखी। उनकी बात को गंभीरता से लेते हुए ग्राम पंचायत ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत उनके लिए पशु शेड निर्माण को स्वीकृति दी। करीब 0.95 लाख रुपये की लागत से पक्का पशु शेड बनाया गया। निर्माण के दौरान ग्राम पंचायत का पूरा सहयोग मिला और इस प्रक्रिया में अनारकली को मजदूरी भी प्राप्त हुई, जिससे उनकी आय में तुरंत सहारा मिला। शेड बनने के बाद जैसे उनकी जिंदगी बदल गई। अब उनके पशुओं को सुरक्षित, साफ और व्यवस्थित आश्रय मिलने लगा। इसका सीधा असर पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन पर पड़ा। पहले जहां उनके पास लगभग 11 पशु थे, वहीं अब उनकी संख्या बढ़कर 35 के करीब पहुंच गई है।
आज अनारकली केवल खेती तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दूध व्यवसाय से भी अच्छी आमदनी कमा रही हैं। उनकी वार्षिक आय अब 2 लाख रुपये से अधिक हो गई है। श्रीमती अनारकली बताती है कि पहले हर समय पशुओं की चिंता बनी रहती थी। बारिश, ठंड, हर मौसम में परेशानी होती थी। पक्का शेड बनवाने का सपना था, लेकिन पैसों की कमी आड़े आती थी। मनरेगा योजना से यह संभव हुआ। शेड का निर्माण होने से पशु सुरक्षित हैं, उनकी संख्या भी बढ़ रही है और आमदनी भी। इसके लिए उन्होंने राज्य सरकार का आभार व्यक्त किया।

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