दुर्ग-भिलाई 7 घंटे पहले नगर पालिक निगम रिसाली में सफाई ठेके को लेकर चल रहा विवाद सोमवार को अचानक बढ़ गया। पहले सुबह-सुबह सफाई कर्मचारियों ने महापौर शशि सिन्हा के घर का घेराव कर नाराजगी जताई। कर्मचारियों का कहना था कि, सफाई व्यवस्था और ठेके से जुड़े फैसलों को समय पर नहीं लिया गया जिसकी वजह से काम प्रभावित हो रहा है और उन्हें भी परेशानी उठानी पड़ रही है।
कर्मचारियों के विरोध के बाद महापौर सीधे निगम कार्यालय पहुंच गईं। उनका कहना था कि, वे इस पूरे मामले पर आयुक्त से बात करना चाहती हैं। लेकिन काफी देर तक इंतजार करने के बाद भी आयुक्त बाहर नहीं आए। इसे लेकर महापौर नाराज हो गईं। उन्होंने आयुक्त के चेंबर के बाहर ही धरना शुरू कर दिया।
सफाई व्यवस्था ठप होने और नए टेंडर में देरी को लेकर महापौर सहित कांग्रेस के कई पार्षद आयुक्त के कक्ष के सामने धरने पर बैठ गए। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने मौके पर पुलिस बल तैनात किया और एसडीएम भी स्थिति पर नजर बनाए रहे।
आयुक्त चैंबर के बाहर बेहोश हुई महापौर शशि सिन्हा।
आयुक्त चैंबर के बाहर बेहोश हुई महापौर शशि सिन्हा।
एमआईसी सदस्यों ने कहा- महापौर ने सुबह से कुछ नहीं खाया था दोपहर करीब 4 बजे अचानक वे बेहोश हो गईं। वहां मौजूद लोगों ने तुरंत उन्हें उठाकर अस्पताल पहुंचाया।
उन्हें जवाहरलाल नेहरू अस्पताल सेक्टर-9 में भर्ती कराया गया। शाम करीब 5 बजे तक भी उन्हें पूरी तरह होश नहीं आया था और डॉक्टर उनकी निगरानी कर रहे थे।
महापौर ने कलेक्टर को लिखा है पत्र
बता दें कि, सफाई ठेके को लेकर महापौर परिषद के सदस्य और सभापति ने जिला कलेक्टर दुर्ग को एक पत्र भी भेजा है। पत्र में आरोप लगाया गया है कि सफाई ठेके की प्रक्रिया में गड़बड़ी की जा रही है और ठेकेदार को फायदा पहुंचाने की कोशिश हो रही है।
पत्र में कहा गया है कि महापौर परिषद की बैठक में यह तय किया गया था कि नई निविदा प्रक्रिया एक महीने के भीतर पूरी कर ली जाएगी। साथ ही पुराने ठेकेदार को केवल दो महीने का समय दिया जाएगा।
ताकि इस बीच नई व्यवस्था तय हो सके। लेकिन इसके उलट निगम आयुक्त की ओर से कुछ आदेश जारी कर दिए गए, जिनके जरिए मौजूदा ठेकेदार को अगली निविदा होने तक काम करने की अनुमति दे दी गई।
एमआईसी के फैसले के खिलाफ निकाला आदेश
महापौर से की गई शिकायत में कहा गया है कि, यह फैसला महापौर परिषद के तय फैसले के खिलाफ है। इससे दूसरे ठेकेदारों को मौका नहीं मिल पाएगा और प्रतिस्पर्धा भी खत्म हो जाएगी। यही वजह है कि पूरे मामले की जांच की मांग की गई है।
महापौर परिषद के सदस्यों ने कलेक्टर से मांग की है कि, आयुक्त के आदेशों को तुरंत रद्द किया जाए और सफाई ठेके की प्रक्रिया नियम के अनुसार पूरी कराई जाए/
रिसाली निगम नेता प्रतिपक्ष शैलेंद्र साहू ने बताया कि महापौर और उनकी MIC खुद अपना लाभ पाने के लिए ठेकदार से कई बार कमीशन की मान कर चुके है कमीशन नहीं मिलने पर महापौर आयुक्त पर निराधार आरोप लगा रही है,राज्य में भाजपा सरकार है हम यहां कमीशन का खेल नहीं होने देंगे/
आयुक्त बोलीं- शासन के निर्देश का इंतजार
रिसाली नगर निगम की आयुक्त मोनिका वर्मा ने कहा कि, सफाई का ठेका जनवरी में खत्म हो गया था। इसके बाद व्यवस्था बनाए रखने के लिए इसे 14 मार्च तक बढ़ाया गया था। उन्होंने बताया कि नए टेंडर को लेकर शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है, लेकिन अभी तक वहां से कोई निर्देश नहीं मिले हैं।
इसलिए आगे की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। आयुक्त ने यह भी कहा कि महापौर परिषद की ओर से सफाई कर्मियों को सीधे भुगतान करने का प्रस्ताव दिया गया है, लेकिन यह नगरी प्रशासन विभाग नियम 2016 के अनुरूप नहीं है। ऐसे में आगे की कार्रवाई उच्च अधिकारियों के निर्देश मिलने के बाद ही की जाएगी। इससे पूर्व भी पी वी रमन का ठेका खत्म होने पर उसका टाइम भी बढ़ाया गया था क्योंकि जब तक शासन की ओर से टेंडर की प्रकिया नहीं कराई जाती है / इस अति आवश्यक कार्य को रोका नहीं जा सकता है सफाई के बिना पूरा रिसाली क्षेत्र में गंभीर समस्या का सामना करना पड़ सकता है /










