हर महिला के संघर्ष, त्याग, बलिदान को दर्शाती है। फिल्म रमाई

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बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर की विश्व व्यापी छवि के पीछे उनकी पत्नी रमाबाई अंबेडकर जिन्हें हम सब श्रद्धा और प्यार से रमाई कहते हैं उनका बहुत बड़ा योगदान था। रमाई हिंदी फिल्म में हर स्त्री की त्याग संघर्ष बलिदान की कहानी दिखाने की कोशिश की है जो परदे के पीछे रहकर अपने पति, परिवार समाज और देश के लिए करती है। इस फिल्म की प्रोड्यूसर कृष्णा चौहान है तथा इस फिल्म को प्रेरणा यूनिवर्सल फिल्म ने प्रस्तुत किया है। इस फिल्म की शूटिंग भिलाई और मुंबई में हुई है और अधिकांश कलाकार छत्तीसगढ़ के हैं। फिल्म में शाहू महाराज बड़ौदा नरेश के भूमिका मुंबई के प्रसिद्ध कलाकार रजा मुराद जी ने निभाई है जिनके शानदार अभिनय और बुलंद आवाज के सभी दीवाने हैं। बाबा साहेब के बड़े भाई की भूमिका में हमारे भिलाई के ही नत्था उर्फ ओमकार दास मानिकपुरी ने अपने अभिनय के जलवे दिखाए हैं। फिल्म का संगीत बहुत ही कर्णप्रिय है और इसे मधुर संगीत की धुनों से सजाया है मुंबई के संगीतकार दिनेश अर्जुना जी ने । फिल्म में बॉलीवुड सिंगर वैशाली माड़े (पिंगा ग पोरी पिंगा, फिल्म बाजीराव मस्तानी) तथा सुहासिनी बेलोन्डे (बालीवुड फिल्म करीब चोरी चोरी नजरे मिली), दिनेश अर्जुना और डॉक्टर नेहा ने अपने मधुर आवाज से इस फिल्म में जान डाल दी है। फिल्म का पोस्ट प्रोडक्शन वर्क Qlab अंधेरी में हुआ है। सबसे बड़ी बात फिल्म में बाबासाहेब अंबेडकर की भूमिका में भिलाई इस्पात संयंत्र के जवाहरलाल नेहरू हॉस्पिटल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी तथा प्रसिद्ध बर्न सर्जन, सेवाभावी चिकित्सक डॉ उदय कुमार ने बाबा साहेब की भूमिका को बड़े पर्दे पर बखूबी निभाया है।इस फिल्म के मुख्य किरदार रमाबाई अंबेडकर माता रमाई की भूमिका पूर्व मिसेज यूनिवर्स का खिताब 2023 में यूरोप से जीत कर आई भिलाई की गौरव प्रेरणा धाबर्डे जी ने निभाया है। इस किरदार में अपने इमोशन और सादगी भरे अभिनय से दर्शकों की आंखों में आंसू लाने में कामयाब रही है। फिल्म बहुत ही शिक्षाप्रद, सामाजिक और प्रेरणादायक है। यह हर घर, समाज, देश- विदेश की सामान्य नारी की कहानी है, उसके संघर्ष की कहानी है, उसके साहस की निशानी है जिसे वह हमेशा दूसरों के लिए करती है। फिल्में रमाई अपने चार बच्चों को पैसे और इलाज के अभाव में खो देती है और जब अच्छी आर्थिक स्थिति होती है और रमाई के पास सोने के गहने होते हैं तो उसे भी वह बच्चों के आश्रम में बच्चों के भूखा देखकर बच्चों के लिए खाने की व्यवस्था के लिए दे देती है। फिल्म के मधुर और भावपूर्ण गीतों को बॉलीवुड के गीतकार डॉ श्रीकृष्णा राउत और गौतम शेन्दे जी ने लिखा है। सबसे महत्वपूर्ण इस फिल्म के लेखक डायरेक्टर कबीरदा है जिन्होंने इस फिल्म के जरिए छत्तीसगढ़ के नवोदित कलाकारों को मौका दिया और उनसे अच्छा अभिनय कराया।

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