रायपुर, छत्तीसगढ़ की राजनीति में धान खरीदी का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। आम आदमी पार्टी ने भाजपा सरकार पर किसान-विरोधी नीतियों का आरोप लगाते हुए बड़ा आंदोलन का ऐलान किया है।
पार्टी का कहना है कि खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में धान खरीदी 15 नवंबर 2025 से शुरू हुई, लेकिन 6 फरवरी 2026 को अचानक बंद कर दी गई। इससे प्रदेश के लाखों किसान खासकर लगभग 3 लाख किसान अपना धान बेचने से वंचित रह गए हैं। AAP ने आरोप लगाया है कि सरकार ने टोकन व्यवस्था बिगाड़ी, रकबा समर्पण जबरन करवाया, भुगतान में देरी की और छोटे किसानों को सिर्फ 25 हजार रुपये एक बार में दिए जा रहे हैं।प्रदेश संगठन मंत्री संजीत विश्वकर्मा ने इसे “सुनियोजित साजिश” बताया, जबकि लोकसभा अध्यक्ष गीतेश्वरी बघेल ने चेतावनी दी कि यदि कोई किसान कर्ज के बोझ से आत्महत्या करता है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी भाजपा सरकार की होगी। पार्टी ने केंद्र की अमेरिका ट्रेड डील को भी भारतीय किसानों के खिलाफ बताया है।
AAP की मुख्य मांगें:
धान खरीदी की समय सीमा को तुरंत बढ़ाकर कम से कम 28 फरवरी 2026 तक किया जाए।
सभी किसानों के लिए समुचित टोकन व्यवस्था लागू हो।
जबरन रकबा समर्पण के लिए सरकार माफी मांगे।
यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो 10 फरवरी 2026 को रायपुर में मुख्यमंत्री निवास का घेराव किया जाएगा। दुर्ग और बेमेतरा से सैकड़ों कार्य किसान शामिल होंगे।
रायपुर मुख्यमंत्री निवास का घेराव किया जाएगा। दुर्ग और बेमेतरा से सैकड़ों कार्यकर्ता और किसान शामिल होंगे। पार्टी ने इसे “ऐतिहासिक” और “आर-पार की लड़ाई” करार दिया है।
दूसरी ओर, सरकार ने कुछ किसानों (जिनका टोकन लंबित था या सत्यापन बाकी) के लिए 5-6 फरवरी तक विशेष खरीदी की अनुमति दी थी, लेकिन AAP का कहना है कि यह काफी नहीं है और अभी भी हजारों किसान परेशान हैं।
अब देखना होगा कि क्या यह आंदोलन बड़ा रूप लेगा? या सरकार कोई नया फैसला लेगी?







