रानीतराई/पाटन, दुर्ग जिले और हाई-प्रोफाइल पाटन विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले रानीतराई क्षेत्र में इन दिनों अवैध ईंट भट्ठों का कारोबार धड़ल्ले से फल-फूल रहा है। क्षेत्र के निपानी, चुलगहन, केसरा, बोरेदा और खुडमड़ी जैसे नदी किनारे के दर्जन भर गांवों में बिना किसी वैध अनुमति के ईंटों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुँच रहा है, बल्कि शासन को भी लाखों के राजस्व की चपत लग रही है।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर खेतों की उपजाऊ मिट्टी की खुदाई की जा रही है। ईंट पकाने के लिए भारी मात्रा में लकड़ी और कोयले का उपयोग हो रहा है, जिससे निकलने वाला धुंआ आसपास की बस्तियों और फसलों के लिए हानिकारक साबित हो रहा है।
नियमों की हो रही सरेआम अवहेलना–
नियमतः ईंट भट्ठा संचालन के लिए खनिज विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्थानीय पंचायत से अनुमति लेना अनिवार्य है। लेकिन क्षेत्र के इन गांवों में अवैध उत्खनन तालाबों और निजी भूमि से बिना रॉयल्टी चुकाए मिट्टी निकाली जा रही है।
भट्ठों में भारी मात्रा में भू-जल का दोहन हो रहा है।
सुरक्षा मानकों का अभाव: भट्ठों पर काम करने वाले मजदूरों के लिए न तो सुरक्षा के इंतजाम हैं और न ही उनके स्वास्थ्य का कोई ख्याल रखा जा रहा है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
हैरानी की बात यह है कि मुख्य मार्ग से सटे इन गांवों में दर्जनों भट्ठों की चिमनियाँ दिन-रात धुआं उगल रही हैं, फिर भी राजस्व और खनिज विभाग की टीम इस ओर ध्यान नहीं दे रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि रसूखदारों के संरक्षण में यह खेल लंबे समय से चल रहा है।
”अवैध भट्ठों की वजह से धूल और धुएं से जीना मुहाल हो गया है। सड़कों पर भारी वाहनों की आवाजाही से रास्ते भी खराब हो रहे हैं।”
अब देखना होगा कि प्रशासन इन अवैध ईंट भट्ठों पर कार्रवाई कर पाता है या फिर यह अवैध कारोबार इसी तरह बेखौफ चलता रहेगा।







