विमल थापा भिलाई——
भिलाई, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने कहा था, “हम जो पाते हैं उससे जीवन चलाते हैं, लेकिन जो हम देते हैं उससे जीवन सार्थक बनता है।” छत्तीसगढ़ के प्रखर समाजवादी नेता स्व. गुलाब सिंह (जिन्हें लोग प्यार से ‘बाबू साहब’ कहते थे) इसी कसौटी पर सौ फीसदी खरे उतरते थे। उन्होंने समाज से जितना पाया, उससे कहीं अधिक संघर्षों के माध्यम से समाज को लौटाया। उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार अशोक पंडा ने उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को याद किया।
डॉ. लोहिया के विचारों के संवाहक
औद्योगिक नगरी भिलाई में एक निष्ठावान कर्मी के रूप में अपनी सेवाएं देने वाले गुलाब सिंह मानवीय दायित्वों के प्रति भी उतने ही वफादार थे। वे समाजवादी आंदोलन के प्रणेता डॉ. राम मनोहर लोहिया के विचारों से गहराई से प्रभावित थे। उनके हृदय में प्रख्यात समाजवादी संत और लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय संरक्षक श्री रघु ठाकुर के प्रति अटूट आस्था थी।
आंदोलनों की जान थे ‘बाबू साहब’
स्व. गुलाब सिंह छत्तीसगढ़ में विषमताओं को मिटाने और जनाधिकारों की बहाली के लिए होने वाले हर आंदोलन में अग्रिम पंक्ति में खड़े रहते थे। व्यवस्था के दमनकारी हथकंडों, जेल जाने या नौकरी खोने का डर उन्हें कभी डिगा नहीं पाया। उनकी ‘सिंह गर्जना’ आंदोलनों में जान फूंक देती थी। साथियों को उन पर अटूट विश्वास था कि वक्त आने पर बाबू साहब के कदम कभी पीछे नहीं हटेंगे।
छत्तीसगढ़ के वर्तमान हालातों में खलती है कमी
वरिष्ठ पत्रकार अशोक पंडा ने वर्तमान परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज जब छत्तीसगढ़ की पहचान—जन, जल, जंगल और जमीन—संकट में है, तब बाबू साहब जैसे जुझारू व्यक्तित्व की कमी गहराई से महसूस होती है। उन्होंने लेख में उल्लेख किया:
बस्तर से सरगुजा तक वनों की निर्मम कटाई जारी है।
आदिवासियों और निर्धन जनों को उनकी जमीन से बेदखल किया जा रहा है।
खनिज संपदा की लूट और आर्थिक विषमता के कारण ‘शांति का टापू’ कहे जाने वाले प्रदेश में खामोशी और चिंता पसरी है।
एक सच्चे मित्र और निर्भीक नेता
स्व. गुलाब सिंह को गुजरे लंबा अरसा हो गया है, लेकिन लोगों के मन में उनके प्रति श्रद्धा आज भी कम नहीं हुई है। वे ‘दोस्तों के दोस्त’ थे और हर सुख-दुख में साथ खड़े रहते थे। आज की परिस्थिति में लोग महसूस करते हैं कि यदि उनके बीच ‘बाबू साहब’ होते, तो वे हाथ में झंडा थामे बराबरी और हकदारी की आवाज बुलंद कर रहे होते और सोई हुई व्यवस्था को जगाने के लिए सड़कों पर संघर्ष कर रहे होते।
उनकी पुण्यतिथि पर प्रदेश के समस्त समाजवादी कार्यकर्ताओं और शुभचिंतकों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।







