पार्षद पतियों के हस्तक्षेप पर शासन की सर्जिकल स्ट्राइक, अहिवारा सहित प्रदेश भर में निर्देश जारी

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​राकेश जसपाल की रिपोर्ट ——


​नंदिनी अहिवारा , छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों में अब ‘पार्षद पति’ राज नहीं चलेगा। राज्य शासन ने महिला पार्षदों के पतियों और रिश्तेदारों द्वारा शासकीय कार्यों में किए जा रहे दखल को गंभीरता से लेते हुए सख्त प्रतिबंध लगा दिया है। शासन के इस आदेश के बाद अब अहिवारा नगर पालिका सहित प्रदेश के सभी निकायों में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के परिजनों का हस्तक्षेप पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

​कार्यालयीन कार्यों और बैठकों में नो-एंट्री—

​शासन द्वारा जारी स्पष्ट आदेश के अनुसार, महिला पार्षदों के पति या परिजन न तो कार्यालयीन कार्यों में दखल दे सकेंगे और न ही किसी अधिकारी या कर्मचारी पर विकास कार्यों को लेकर दबाव बना सकेंगे। इसके अलावा:
​नगर पालिका की आधिकारिक बैठकों में परिजनों का बैठना प्रतिबंधित होगा।
​निरीक्षण या किसी भी प्रशासनिक प्रक्रिया में रिश्तेदार शामिल नहीं हो सकेंगे।
​महिला पार्षद की जगह उनके परिजन कोई भी निर्णय नहीं ले पाएंगे।

​अहिवारा के इन वार्डों से मिली थी शिकायतें—–

​जानकारी के अनुसार, अहिवारा नगर पालिका के वार्ड क्रमांक 3, 7, 8 और 10 में महिला पार्षदों के पतियों द्वारा कामकाज संचालित करने और अधिकारियों पर दबाव बनाने की लगातार शिकायतें सामने आ रही थीं। कई बार पार्षद स्वयं उपस्थित न होकर अपने परिजनों को भेज देती थीं, जिससे शासकीय कार्यों में बाधा उत्पन्न होती थी।

​हस्तक्षेप पर होगी दंडात्मक कार्रवाई—-

​शासन ने चेतावनी दी है कि यदि कोई भी पार्षद पति या रिश्तेदार नियमों का उल्लंघन करते हुए पाया जाता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस कदम का उद्देश्य नगरीय निकायों के कामकाज में पारदर्शिता लाना और महिला सशक्तिकरण के वास्तविक उद्देश्य को पूरा करना है।

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