महासमुंद के खमतराई में ‘गौधाम योजना’ को लेकर बैठक: गौवंश संरक्षण के साथ रोजगार के खुलेंगे द्वार

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कमलेश डडसेनाकी रिपोर्ट—–

​महासमुंद, छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग द्वारा घुमंतू गौवंशों के उचित आश्रय और संरक्षण के लिए शुरू की गई ‘गौधाम योजना’ को लेकर ग्राम खमतराई में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। गौधाम समिति द्वारा आयोजित इस बैठक में ग्रामीणों को योजना के लाभ और आवेदन प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई, जिसे लेकर ग्रामीणों में भारी उत्साह देखा गया।

​पंजीकृत संस्थाएं और महिला समूह कर सकेंगे आवेदन—–
​बैठक को संबोधित करते हुए गौ सेवा आयोग के जिलाध्यक्ष श्री नीलेश पटेल ने बताया कि गौधाम के संचालन के लिए कोई भी पंजीकृत संस्था या महिला स्व-सहायता समूह आवेदन कर सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग द्वारा गौधाम की संरचना पूर्ण करने के लिए विशेष अनुदान प्रदान किया जाता है। पटेल जी ने अनुदान प्राप्त करने की पात्रता और तकनीकी बारीकियों पर भी चर्चा की।

​पैरादान और आत्मनिर्भरता पर जोर—-
​गौ सेवा आयोग के सदस्य (विकासखण्ड महासमुंद) श्री राजा अग्रवाल ने आगामी वर्षा ऋतु को देखते हुए चारे की व्यवस्था पर जोर दिया। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे चारे के संकट से बचने के लिए अधिक से अधिक ‘पैरादान’ करें। उन्होंने कहा कि यह योजना केवल गौवंश संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि:
​इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
​महिलाओं के स्वालंबन और उत्थान के लिए विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
​प्रत्येक विकासखण्ड में वर्तमान में 10 गौधाम संचालित करने निर्देश प्राप्त हुए हैं।

​ग्रामीणों की सक्रिय सहभागिता—-
​बैठक में गौ सेवा आयोग के जिला सदस्य गीतेश पण्डा सहित ग्राम खमतराई के बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। ग्रामीणों ने गौवंश संवर्धन की इस पहल का स्वागत किया और योजना से जुड़ने की इच्छा जताई।
आवारा पशुओं (घुमंतू गौवंश) को सुरक्षित आश्रय देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से प्रत्येक ब्लॉक में 10 गौधाम बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

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