मो युसूफ खान ✍🏾
अंडा // दुर्ग //
दुर्ग जिला अंतर्गत पाटन से अण्डा तक 132 के.वी. विद्युत लाइन परियोजना को लेकर किसानों का असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को प्रभावित किसानों ने दुर्ग ग्रामीण विधानसभा के विधायक ललित चंद्राकार के निजी सहायक युवराज बेलचंदन को विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि किसानों की मुआवज़ा समस्याओं को आगामी शीतकालीन सत्र में प्रमुखता से उठाया जाए। किसानों का कहना है कि परियोजना से उनकी भूमि, फसल और भविष्य की कृषि उपयोगिता पर गंभीर असर पड़ेगा, लेकिन विभागीय प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है।
किसानों के मार्गदर्शन हेतु किसान नेता ढालेश साहू उपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि ग्राम मंटग, बोदल, मर्रा, मचांदूर, रिसामा, अण्डा सहित आसपास के गांवों के किसान इस परियोजना से प्रभावित हैं और इनमें से दो दर्जन से अधिक किसान इस अवसर पर एकजुट होकर पहुंचे। उन्होंने कहा कि किसानों को सर्वे रिपोर्ट, मार्ग चयन, प्रभाव आकलन और प्रस्तावित मुआवज़ा की लिखित प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे संदेह और नाराज़गी बढ़ रही है।
किसानों ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि विभाग द्वारा केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड दर 2025–26 और शासनादेश 10 मार्च 2025 को नजरअंदाज किया जा रहा है, जबकि इन्हीं के आधार पर भूमि, फसल और प्रतिबंधित उपयोग के नुकसान का मूल्यांकन अनिवार्य है। किसानों ने कहा कि जब तक विधिसम्मत मुआवज़ा तय नहीं होता, तब तक 132 के.वी. लाइन निर्माण कार्य रोकना चाहिए। प्रभावित किसानों में बालाराम साहू, प्रशांत कुमार, राजेश कुमार,महेश, दिनेश, तोरण लाल , गोविंद कुमार, देवेन्द्र कुमार उपस्थित थे।
*किसानों की प्रमुख मांगों में—*
• केन्द्रीय मूल्यांकन बोर्ड दर 2025–26 के अनुसार भूमि मूल्यांकन,
• फसल व वृक्षों की वास्तविक क्षति का समुचित मूल्यांकन,
• सर्वे एवं मार्ग चयन की जानकारी सार्वजनिक करना,
• आपत्ति-निवारण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना,
• तथा मुआवज़ा वितरण पूर्ण होने के बाद ही निर्माण कार्य प्रारंभ करना—शामिल किया गया है।






