छग , रायपुर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद मीडिया को संबोधित किया। उन्होंने नक्सलियों को चेतावनी दी कि अगर उन्होंने हिंसा का रास्ता नहीं छोड़ा, तो उनके खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की जाएगी। शाह ने कहा कि 2026 तक देश को नक्सल समस्या से पूरी तरह मुक्त करने का लक्ष्य है। उन्होंने राज्य सरकार की सराहना की और कहा कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल हुई है।
अमित शाह ने बैठक के दौरान बताया कि नक्सल प्रभावित जिलों में सरकार की योजनाओं को लागू करने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। उनका कहना था कि वामपंथी उग्रवाद भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चुनौती है और इसके कारण पिछले चालीस सालों में लगभग 17,000 लोगों की जान गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कानून व्यवस्था स्थापित करना और विकास कार्यों को प्राथमिकता देना, सरकार का मुख्य उद्देश्य है।
उन्होंने जानकारी दी कि 2010 में 96 जिले नक्सल प्रभावित थे, जो अब घटकर 42 रह गए हैं। इसके साथ ही, नक्सल घटनाओं में भी 53% की कमी आई है। केंद्र सरकार ने नक्सलियों के वित्तीय तंत्र पर भी करारा प्रहार किया है, जिसमें ईडी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
शाह ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और डिप्टी सीएम विजय शर्मा को धन्यवाद दिया, जिन्होंने नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई में बड़ी सफलता हासिल की है। उन्होंने बताया कि सुकमा के छह गांवों में पहली बार आदिवासियों ने मतदान किया है, जो कि एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
बस्तर में 1500 से अधिक मोबाइल टावर लगाए गए हैं, जिससे कनेक्टिविटी में सुधार हुआ है। सड़कों, डाकघरों, बैंकों और एटीएम जैसी सुविधाओं का विस्तार किया गया है। शाह ने नक्सलियों से अपील की कि वे हथियार छोड़ें और सरकार उनकी सुरक्षा और पुनर्वास की जिम्मेदारी लेगी। उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और इसके लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।






