प्राप्त जानकारी के अनुसार नगर पालिका परिषद बालोद के द्वारा वर्ष 2008 में गरीबों के लिए शासन की योजना अंतर्गत 3 एकड़ 45 डिसमिल घांस भूमि में पक्का मकान दोमंजिला कुंदरूपारा बालोद में बनाया है परंतु, शिकारीपारा बालोद निवासी वीरेंद्र यादव एवं उनके परिवार के द्वारा निर्माणधीन मकान की भूमि उनके पूर्वजों की होने का दावा करते हुए विद्वान राजस्व मंडल बिलासपुर, सर्किट कोर्ट रायपुर के समक्ष पुनरीक्षण आवेदन पेश किया था,… नगर पालिका परिषद बालोद की ओर से “अधिवक्ता भेषकुमार साहू” के द्वारा न्याय सम्मत तर्क पेश कर न्यायालय को बताया कि, सन् 1950-51 के मालिक मकबूजा घोषणा पत्र के अनुसार उनके पूर्वजों का नाम मौसमी कृषक की हैसियत से दर्ज होने से उन्हें स्वामित्व का अधिकार नही मिल जाता, ..जमीदार उन्मूलन के पूर्व से ही उनके पूर्वजों का नाम वैध स्वामित्व में रहा हो या राजस्व अभिलेख में लिपिकिय त्रुटिवश उनके पूर्वजों का नाम विलोपित हो गया है, इस बात को प्रमाणित नहीं किया गया है, ऐसे स्थिति में अभिलेख का शुद्धिकरण नहीं किया जा सकता, वैसे भी भू राजस्व संहिता की धारा 57 के तहत “राज्य की समस्त भूमिया में राज्य का स्वामित्व है”.. विद्वान पीठासीन सुश्री रीता शांडिल्य के द्वारा उपरोक्त विधि सम्मत तर्क के पश्चात वीरेंद्र यादव के आवेदन को खारिज की है,….
..उपरोक्त सफलता मिलने पर भूमि व आवासहिन गरीब परिवार के लोगों के द्वारा तथा बालोद के प्रबुद्ध नागरिकों ने और परिषद के अध्यक्ष श्री विकास चोपड़ा, ने “अधिवक्ता भेषकुमार साहू” को ढेरों बधाई एवं शुभकामनाएं दी






